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चारो तरफ अंधेरा

 जीवन मे हर उस व्यक्ति के जीवन में अंधेरा आया है और आता हैं। जीवन का नाम ही संघर्ष है जीवन सरल और साधारण नही होता। जैसा हम चाहते हैं वैसा भी नही होता। जीवन उबड़ खाबड़ सड़क की तरह हैं। 


     क्या आपने केअभी हार्ट का चेकअप करवाया हैं। या ईसीजी करवाई होगी। इनमें सदैव लाइन ऊपर निचे अर्थात ऊपर नीचे की तरफ बहती हैं। ऊपर नीचे बहने से ही डॉक्टर के  चेहरे पर शांति के भाव रहते हैं। साथ ही डाक्टर सन्तुष्ट रहते हैं। जिस मरीज की हार्ट लाइन सीधी बहने लगती हैं। समझो उसकी जिंदगी का सफर खत्म होने वाला हैं। 
   जीवन का सार हैं कि जो व्यक्ति यह कहता हैं कि मेरा जीवन तो मजे में हैं पिछले 30 सालों से मजे की जिंदगी जी रहा हूँ तो समझो उसने कोई रिस्क ली ही नही। न ही उसने अपनी सामर्थ्य से बाहर जाकर कोई कार्य क़िया।
अर्थात वो व्यक्ति सेफ जोन यानी अपने एरिया या पुश्तेनी कार्यो पर ही जीवन चला रहा हैं। यानी उसने अलग से नया और आने वाले भविषय को लेकर कोई कार्य किया ही नही।
  
जिसने कभी नया जीवन नया दौर और नया कार्य या नया शोध या नया कोई विशेष उद्देश्य से सुरक्षित क्षेत्र वसे बाहर ही नही निकला तो फिर वो कमजोर और अंदर से डर के कारण अपने माता पिता के साथ ही रहकर जीवन यापन का कार्य तो कर लेगा। लेकिन कुछ नया नाम या इतिहास नही बना पायेगा।
  आपको क्या लगता हैं कि जीवन सिर्फ आराम का जीवन और बिना रिस्क की जिंदगी को ही कहते हैं। दो वक्त की रोटी और रहने के लिए घर और कपड़े व घर गृहस्थी तक सीमित रहना। 
क्या आज जो बड़े बड़े अविष्कारक या बिज़नेस मैन और खिलाड़ी या आसमान की ऊंचाइयों से लेकर सम्पूर्ण संसार मे नाम करने वाले नेता अभिनेता क्या यह किसी घर और माता पिता की औलाद नही हैं। और एक बात आज संसार मे जितने भी अमीर और विशेष पायदानों पर बैठे हैं वो सभी अपने सेफ जोन यानि सुरक्षित क्षेत्रो से बाहर निकल कर संघर्ष से अपना नाम बनाया 
  लेकिन क्या आपको पता हैं कि आजके 90% सफल लोगो का बचपन हो या जवानी मुश्किल हालातो और तानो में अपने पराये बन गए। दोस्त मुश्किल घड़ियों में साथ छोड़ गए लेकिन जो उतना होते हुए भी यानि जिंदगी ने चारों तरफ अंधेरा कर दिया। कही कुछ दिखना बन्द हो गया कभी कभी मुसीबत के अंधेरो से घबरा कर कई लोगो ने अपने निर्णय बदलने की सोच ली और अंतिम निर्णय से पहले कुछ घटित हो गया।
किसी बुक में पढ़ा था कि मैंने उस रात अपने सपनो को छोड़ देने का निर्णय किया और यह मेरा अंतिम निर्णय था। जो बात मुझे सबसे ज्यादा अखर रही थी वो थी कि घर वाले मेरे साथ थे लेकिन मैं अंदर से टूट चुका था। यानी वो रात मेरे वर्षो की मेहनत और सपनो को तिलांजलि देने वाली अंतिम रात थी।
लेकिन हुआ यूं कि मेरे घर पर मेरे पापा के कॉलेज फ्रेंड आये हुए थे जो उसी शहर में किसी मोटिवेशन सेमिनार में आये हुए थे। यानी मोटिवेशन स्पीकर थे।
रात के खाने के बाद मैं छत पर चला गया था। मैं छत पर बैठा कुछ सोच रहा था तभी मुझे पीछे से किसी ने आवाज लगाई। 
हेलो, बेटा कैसे हो आप,क्या चल रहा हैं। पापा ने बताया कि आप बहुत डिप्रेस और हाँ आप जिस परिजेक्ट पर काम कर रहे थे उसका क्या हुआ। पापा ने बताया को हुम सभी तो साथ दे रहे हैं लेकिन वही हैं जो प्रोजेक्ट बंद करना चाहता हैं। ऐसा क्यो।
अंकल ने मुझे अपने पास बिठाया और मुझसे बताते करने लगे।
अचानक मेरे मुंह से निकल गया अंकल इस प्रोजेक्ट पर मैंने बहुत ज्यादा समय और धन लगाया हैं लेकिन अब मेरे चारो तरफ अंधेरा है। कुछ समझ मे नही आ रहा हैं ।
  तभी अंकल ने मुझे जो मोटिवेशन स्पीच दी वो वास्तव में मेरे दिल और दिमाग को ताजा और मजबूत कर गयी। जो मैं आजतक नही भुला।
  वो मोटिवेशन स्पीच इस प्रकार थी।
जब हमारे जीवन मे एक ऐसा समय आ जाये जब चारो तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा दिखे। समझो वही टाइम आपके जीवन का सबसे अहम हैं। यानी यदि उस अंधेरे से को चीर कर पार कर लिया तो समझो जीवन मे सबकुछ हासिल होगा। 
जैसे एक गाड़ी हजारो किलोमीटर लंबा अंधेरे का सफर सिर्फ हेड लाइट से पार कर लेती हैं गाड़ी पहले ही हजारो किलोमीटर का डर अपने दिमाग मे बिठा कर नही रखती। वो 100 मीटर तक हेड लाइट की रोशनी से आगे बढ़ती रहती हैं। और धीरे धीरे 100 से 200,300,400,2000,5000,10000 हजार से होते हुए अपनी यात्रा को अंतिम रूप दे देती हैं। लेकिन गाड़ी हार नही मानती। कभी भी सम्पूर्ण भार को एक साथ लोड के लिए मत लो। टुकड़ो में सोचो। चरण दर चरण यानी स्टेज बाई स्टेज सोचो और करते रहो।
 दूसरा तुम्हारा नाम क्या हैं तो मैंने बताया राहुल। हाँ तो राहुल एक बात बताओ कि अक्सर पार्टियां भले शादी की हो या बर्थडे की या अन्य रात में ही क्यो होती हैं। तो इसका कारण हैं कि रात के घनघोर अंधेरे में ही तो आपके डेकोरेशन का और चमक का चलेगा। ठीक वैसे ही जब तक अंधेरा नही आएगा तब तक जीवन मे किसी कार्य को लेकर करने में मजा भी नही आएगा। 
  अब तुम ही देखलो हर दिन के बाद रात तो आयेगीं यानी हर स्टेज के बाद तकलीफ तो आएगी। लेकिन यही तो व्यक्ति की सामर्थ्य का पता चलता हैं। 
  जो डर गया वो टूट गया और जो लड़ता रहा वो सो हमलों के बाद जीत जाएगा।
   अब मैं कुछ नही कहूंगा तुमको क्या करना हैं अब तुम सोचो। अंकल ने कहा चलो रात बहुत हो गयी मुझे सुबह लेक्चर के किये जाना हैं।
  वो दिन मुझे आज भी याद है कि अंकल के जाने के बाद मैं 2 मिनेट खुशी से नाचा और नीचे गया मम्मी और पापा मेरे टेंशन में नीचे डाइनिंग में ही बैठे थे मम्मी बर्तन रख रही थी उदास थे दोनों ।
 पिछले 20 दिनों बाद मेरी चाल और छत से नीचे आत्म विश्वास से आते देख कर दोनों आश्चर्य से मेरी और देख रहे थे। मैं दोनों के पास गया और बोला चलो मम्मी मैं आप दोनों के लिए कोल्ड कॉफ़ी बना देता हूँ आज मैं भी पिऊंगा।
हम सब खुश थे और मैंने उस रात नींद नही अपने प्रोजेक्ट को अपडेट किया और 10 दिन बाद उसी प्रोजेक्ट से आज मैं यहाँ हूँ कि आज मैं स्वयं मोटिवेशन बक लेक्चर लेने अहमदाबाद आया हूँ। 
  तो यह हैं अंधेरे से निकलकर जिंदगी को दिशा देना और सफल होना। 
    अब आप कितना समझे मुझे कमेंट में लिखे।

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