आज की पोस्ट जिस विषय पर हैं वो विषय हैं गुस्सा। यानी क्रोध। क्रोध जोकि शरीर को वो अवस्था जिसमे इंसान कुछ समय के लिए जो क्षणिक भी हो सकता हैं और घन्टो और दिनों की अवधि भी हो सकता हैं। जोकि समय की कोई माप सिमा नही हैं।
क्रोध जोकि इंसान के पतन का कारण हैं यह मैं और आप सदियो से पढ़ते आ रहे हैं। जोकि शायद सच्च भी हैं बड़े बड़े विद्वानों और मनीषियों ने कहा हैं।
क्रोध जोकी ताप और आग का एक प्रकार हैं जोकी अदृश्य और कब और किस विषय पर आ सकता हैं पता नही। जीवन मे सदैव ध्यान रखे कि जीवन मे शांति के साथ दुनिया जुड़ना चाहती हैं। लेकिन अशांति के साथ कोई नही जुड़ना चाहता।
दूसरा शांति पानी हैं। गुस्सा पानी हैं। जीवन मे सदा पानी जैसे रहो जैसा बर्तन वैसा आकार। पानी मे शितलता हैं लेकिन आग जोकि गर्म तापमान को इंगित करती हैं।
अब जीवन मे किसी व्यक्ति को क्रोध क्यो है। क्या कारण रहा होगा कि व्यक्ति के अंदर क्रोध कूट कूट कर भरा हैं।
यदि क्रोध अपने स्वार्थ और अहम या घमंड के कारण हैं तो समझो आपका पतन निश्चित हैं। भले आप कितने ही गुनी और धनी क्यो न हो।
यदि आप अमीर से अमीर है लेकिन यदि आपने क्रोध का रास्ता अख्तियार कर लिया तो समझो आप दुनिया मे अकेले जीवन जीने के लिए मजबुर हो जाएंगे। आपके साथ चलने के लिए कोई तैयार नही होगा।
यदि जीवन मे तरक्की करनी हैं दुनिया मे अपना परचम लहराना हैं। दुनिया में अपना वजूद बनाना हैं तो आपको जीवन मे सिर्फ एक बात का ही ध्यान रखना हैं कि जीवन मे सदा क्रोध कम,दूसरो की गलतियां निकालना बन्द,ज्यादा से ज्यादा अपने जीवन को विकसित व बुरी आदतों को छोड़ने की तरफ मुड़ जाईये। धन यदि आपके पास अताह हैं तब तो चलो लोग आपके क्रोध को कुछ हजम कर जाएंगे। जैसे दूध देने वाली गाय की लात तो सभी खाते हैं लेकिन बिना दूध देने वाली गाय की लात शायद आप और मैं भी पसंद नही करते।
मैंने जिस दिन लेखक बनने का सोचा था उसी दिन से यह निर्णय लिया था कि जीवन की सभी सच्चाइयो से मैं स्वयं निकलूंगा या जीऊंगा जिसको मैंने हर विषय और विभाग से जिया हैं।
अब मैं सकूँ से लिख रहा हूँ बिना कुछ सोचे। क्योकि मैंने भी क्रोध से बहुत कुछ खोया हैं। मेरे अनुभव ही तो मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूँ। जीवन का काला सच मैंने भी जिया हैं। जिसका खामियाजा मैं आज भी भुगत रहा हूँ। जीवन मे यदि क्रोध को काबू कर लेता तो शायद आज कितना आगे होता उसका अंदाज भी जब मैं लगाता हूँ तो अंदर तक सिहर जाता हूँ।
लेकिन क्रोध के दो आयाम होते हैं।
पहला जोकि कठोर अनुसाशन के कारण आता हैं यानी जीवन मे शुरू से नापी तुली और अनुसाशन के कारण अन्यो का गलत और फूहड़ और बेहूदा जीवन पसंद नही आता। लापरवाह और बिगड़ैल रवैया पसन्द नही आता। जोकि जीवन मे अत्यंत और गंभीर अनुसाशन की तरफ मौड़कर इंसान को मजबूत अनुसाशन को मानने और लागू करने वाला बनाता देता हैं। जोकि ऐसे इंसान के साथ साधारण या हर कोई साथ नही चल सकता। यानी यहाँ तक कि परिवार वाले भी ऐसे इंसान से मुँह मौड़ लेते हैं।
दूसरा हैं कि इंसान घमंड और अहम के साथ साथ ईर्ष्या और अपने आपको संसार मे सबसे सर्वेसर्वा समझे। तो यह दुनिया मे संभव हो नही सकता। ऐसा इंसान सिवाय तिरिस्कार के कभी कुछ हासिल नही कर सकता।
जीवन मे सदा बीच का स्वभाव और बीच का रास्ता ही जीवन को सुचारू और व्यवस्थित चलने और रहने में मदद करता हैं। जीवन को नपे तुले और बेहतर रखने के लिए सदैव शांति और गुस्से को नापतोल से लेकर चले।
कही कही गुस्से को छोड़ना और कही कही शांति से जहाँ जीवन चले वहाँ शांति रखना आवश्यक हैं शांति से जीना।
क्रोध 20% और शांति 80% यानी क्रोध का जीवन में जितना स्तर कम होगा शितलता का वास उतना ही ज्यादा होगा। शितलता जितनी ज्यादा होगी समझो आपके पास रिस्तो और दोस्तो का दायरा उतना ज्यादा होगा।
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