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मेरी फिल्म कहानियां। मैं भारत की मशहूर मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री का प्रोफेशनल रजिस्टर्ड  फ़िल्म स्टोरी राइटर हूँ। मेरी लिखी कुछ कहानियों की आउटलाइन प्लाट हैं जिनके PDF नीचे दिए गए हैं। यदि किसी भी प्रोडक्शन को फ़िल्म का आउटलाइन पसन्द आता हैं तो संपर्क कर सकता हैं।

Script Writer Association Card 



1. NASHA EK LAAT ( HOW TO TERRORISM ENTER IN INDIA) FILM Script Idea & Script.

  











2. Mission 300( Story Plot on Alien's V/S Earth)

   





3. Railway Yard




4. Rees  Returns 








 I have all four Film Subjects Orignal Plots ready to write a script for next Block Buster.


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 आज की पोस्ट का शीर्षक है। दहेज प्रथा। लड़की और लड़के के जन्म से ही एक शब्द को जन्म मिल जाता हैं और वो शब्द हैं दहेज।  सदियों से इस दहेज शब्द ने कितने ही तांडव किये हैं और कही शांति के साथ परिवारों को संबल दिया।  जीवन की यात्रा में जब बच्चे बड़े होते हैं तो विरासत में मिली रीति और रिवाजो की धरोहर के मुताबिक यौवन में कदम रखती संतानों को वैवाहिक संबंधों में बांधने और संसार मे ग्रहस्थ जीवन को संबल देने के लिए विवाहो को संपादित किया जाता हैं।  सदियों से इस वैवाहिक परम्परा में दहेज अर्थात पिता अपनी पुत्री को जोकि जीवन के नए वैवाहिक क्षेत्र में कदम रखने जाती हैं तब पिता के घर से पुत्री के घर ससुराल के लिए कुछ आवश्यक वस्तुओं व नीतियों का संग्रह दिया जाता था जोकि उस समय के मुताबिक धातुओं में ही होता था।  जैसे उस समय सोना,चांदी,पीतल,तांबा, कांसा, और मिट्टी व लकड़ी के साथ साथ कपड़े आदि सहयोग वस्तुओं को देने की परंपरा थी।  इस परंपरा का कारण था कि पिता अपनी पुत्री को अपनी हैसियत के मुताबिक कुछ सहयोग और वो भी आवश्यक सामग्री और वस्तुएँ।  जीवन का सार और समय बदला। धातुओं क...

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