आज की पोस्ट का शीर्षक है। दहेज प्रथा। लड़की और लड़के के जन्म से ही एक शब्द को जन्म मिल जाता हैं और वो शब्द हैं दहेज। सदियों से इस दहेज शब्द ने कितने ही तांडव किये हैं और कही शांति के साथ परिवारों को संबल दिया। जीवन की यात्रा में जब बच्चे बड़े होते हैं तो विरासत में मिली रीति और रिवाजो की धरोहर के मुताबिक यौवन में कदम रखती संतानों को वैवाहिक संबंधों में बांधने और संसार मे ग्रहस्थ जीवन को संबल देने के लिए विवाहो को संपादित किया जाता हैं। सदियों से इस वैवाहिक परम्परा में दहेज अर्थात पिता अपनी पुत्री को जोकि जीवन के नए वैवाहिक क्षेत्र में कदम रखने जाती हैं तब पिता के घर से पुत्री के घर ससुराल के लिए कुछ आवश्यक वस्तुओं व नीतियों का संग्रह दिया जाता था जोकि उस समय के मुताबिक धातुओं में ही होता था। जैसे उस समय सोना,चांदी,पीतल,तांबा, कांसा, और मिट्टी व लकड़ी के साथ साथ कपड़े आदि सहयोग वस्तुओं को देने की परंपरा थी। इस परंपरा का कारण था कि पिता अपनी पुत्री को अपनी हैसियत के मुताबिक कुछ सहयोग और वो भी आवश्यक सामग्री और वस्तुएँ। जीवन का सार और समय बदला। धातुओं क...
Moti Singh Rathore(Motivator Rathore) Motivation Speaker & Life Coach, Trainer & Writer जीवन का सबसे अच्छा सार अपने लिए जिओ ही मत। दुख और चिंता खत्म। जीवन को विशेष कार्य योजना में लगा दो। जीवन मे याद रखो 100% लोग जब राम,कृष्ण और अल्लाह से खुश नही हुए तो आप क्यो जूठी आशा में बैठे हो कि 100% लोग आपसे खुश होंगे। सबको खुश रखने के चक्कर मे न पड़ कर अपना जीवन सही और बेहतर कर्मो की तरफ मौड़ दो। मेरे विचारों से संतुष्ट हो या नही लेकिन विचार रखने की आजादी मेरा जन्म सीध अधिकार हैं वाल्तेयर
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