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संगत का असर

 दोस्तो संगत का असर इतनी पुरानी कहावत हैं कि शायद जब आप और मेरा जन्म ही नही हुआ। जन्म से पहले से चली आ रही इस पुरानी कहावत को मैंने मेरे माता पिताजी से सेकड़ो बार सुना। कभी अगर कही गलती हो जाती तो यह कहावत तो मानो दरवाजे और जीभ पर तैयार खड़ी मिलती थी।

अब शायद आप मुझे या पूछेंगे की इस कहावत का क्या सार हैं कुछ को तो पता हैं। जेसी संगत वैसा फल। आज नही तो निश्चय कल।
जीवन मे संगत को असर वास्तव में पड़ता हैं या खाली कहावत ही हैं। जीवन मे संगत से क्या बदल सकता हैं। क्या संगत में इतनी ताकत होती हैं। कि इंसान की आदत को बदल दे। 
क्या इसका मतलब दोस्तों और ऐसे लोगो से दूर रहना चाहिए जिनकी संगत खराब हैं जिनको शराब,जुआ,या और भी कई उल्टी सीधी आदते हैं जो शायद न लग जाये।
तो दोस्तो ऊपर कही गयी बाते सोलह आना सच है।
संगत ही एक ऐसा माध्यम हैं जिसमे इतनी ताकत हैं कि इंसान के विचारो से लेकर तमाम आदतों को बदल देती हैं।
अक्सर यह देखने मे आया हैं कि अच्छे लोगो की संगत में लोग कम जाते हैं। अच्छे लोगो के पास भीड़ कम होती है। अच्छे लोग सही और वास्विक और तय नियमो व नीतियों के साथ बिना किसी नशे और बिना किसी ऐब के अपना जीवन कैसे और कितना सही जिया जाये पर काम करते हैं। 
लेकिन जिनकी चाल चलन और जीवन जीने के ढंग में ही खोट हो। जो जनवरो की तरह सिर्फ मजे और अय्यासी के साथ शराब से लेकर हर प्रकार के उल्टे शौक लेकर बिना किसी तय नीतियों के सिर्फ मजे के लिए जीवन जी रहे हैं। क्या करना हैं जीवन मे क्यों जन्म मिला इंसान का। 
बुरी आदतों वालो को की फर्क नही पड़ता कि लोग क्या कहेंगे और बेइज्जती से तो उन्होंने बहुत पहले रिस्ते तोड़ लिए होते है।
इंसान तो छोड़ो जानवर भी संगत से सुधार जाता हैं और बुरे की संगत से बिगड़ जाता हैं। 
एक कहावत तो आप सभी ने सुनी और पढ़ी है। कि कैसे एक शेर का बच्चा नदी में पानी पीते हुए भेड़ो के झुंड में बिछड़ जाता हैं लम्बे समय के बाद अपने भाई जोकि वर्षो पहले बिछड़ जाता हैं के साथ नदी पर पानी पीता हैं लेकिन जैसे ही सामने शेर को देख कर वो भेड़ो के की तरफ भागता है तब शेर का दूसरा बच्चा नदी के दूसरे छोर आए चीलाता हैं लेकिन वो रुकता नही है वो चिल्ला चिल्ला कर बार बार भेड़ो की तरफ भगता हैं। तब उसको पीछे खडा बुढा शेर कहता हैं कि यह संगत का असर हैं भाई तेरा ही हैं लेकिन तू हमारे साथ रह रहा हैं और वो भेड़ो के साथ रह रहा हैं। इसलिये उसकी सोच और कलेजा भेड़ो जैसा हो गया हैं तू हमारे साथ रहता है इसलिए शेर जैसी ऊंची सोच और शेर जैसा कलेजा हैं। 
यानी जैसे लोगो समाज समूह या व्यक्ति के साथ इंसान हो या जानवर संगत के असर में अच्छे और बुरे गुणों का लेनदेन और कॉपी पेस्ट होता हैं

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