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कर्म का आनंद कल मिले।

 दोस्तो आज की पोस्ट का विषय हैं। कि आज कर्म ऐसे करो जिसका आनन्द व फल कल बजी उत्तम मिले। क्या शराब और गंजे का नशा या ऐसे कर्म जो अय्यासी से लिप्त है। क्या आपको लगता हैं कि ऐसे कर्मो का फल कल उत्तम मिलेगा। जबकि यदि उत्तम कर्म किये गए तो समझो उनका फल आने वाले भविष्य में उत्तम मिलने वाला ही हैं। 

शायद यही दो आयाम हैं जोकी इंसान को बहुत जल्दी यदि भटकाव के समय यह पता चल जाये तो समझो इंसान अपना जीवन  भटकाव से बचा सकता हैं।
भटकाव की उम्र नही होती जबकि इंसानियत को उम्र तो मरने के बाद भी पीढ़ियों को उसका उत्तम फल प्रदान करती हैं।
धरती पर जन्म लेने वाले प्रत्येक इंसान को सिर्फ जानवरो को छोड़ कर सभी कर्मो के फल अपनी आने वाली 7 पीढ़ियों तक फल पहुचने वाले करने चाहिए। 
यानी आप सात पीढ़ी तक तो नही रहोगे लेकिन आपके कर्म सात पीढियो तक रहेंगे जोकि अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मो का फल बुरा। 
समय रहते आज से ही अपने कर्मो का फल सुधारे।
मजबूत और कामजोर में क्या फर्क हैं। 
मजबूत किसी भी कर्म या हत्या शौक और मौज मस्ती के लिए नही करता। जीवन मे कोई ऐसा समय आ जाता हैं जहाँ कही कठोर क़दम उठाने पड़ते हैं तो उसकी गवाही समाज की तरफ से सही और सन्मानिय होनी चाहिए।
कमजोर तो अपने स्वार्थ और शौक मौज मस्ती के लिए कुछ भी कर सकता हैं । लेकिन इतियास कभी इज्जत और सन्मान दिल से नही देगा। तो फिर हासिल क्या किया। 
इसलिए अपने कर्मो को पशुवर्ती वाले नही देववर्ती वाले बनाओ।

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