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मुस्किलो से सामना

 दोस्तो, आज की पोस्ट जिस विषय पर आधारित हैं वो विषय हैं "मुस्किलो से सामना". यानी अगर जीवन मे आगे बढ़ना हैं तरक्की करनी हैं या विशेष नाम और दाम दोनों के साथ रुतबा बढ़ाना है तो आपको मुस्किलो से सामना करना होगा।

शहीदों का सन्मान उनके हौसलों और जान तक पे खेलने से मिलता हैं। किसी भी कार्य मे मुश्किल हालात ही एक मजबूत इंसान का निर्माण करती हैं।
आज जो ट्रेंड चल रहा हैं वो भोग और विलासिता का समय चल रहा हैं। जबकी पहले के समय मे जितने भी महापुरुष और विशेष लोगो ने इन धरती पर नाम किया उनके नाम होने के मुख्य कारण था मुश्किलों से खेलना। 
राम और कृष्ण ने स्वयं कष्ट का जीवन ही चुना क्यो। राणा प्रताप हो या पाबूजी राठौड़ हो या दुर्गा दास राठौड़ हो या पन्ना धाय हो या राणा सांगा या अमर सिंह हो या अन्य।
इतिहास को उठा कर देखलो जिन्होंने जितनी तकलीफ और मुश्किलों से सामना किया उनका आज भी इतिहास में नाम दुनिया जानती हैं।
जितना हम भोग की तरफ जायेंगे उतना ही हम अपने कर्मो को गिराते चले जायेंगे।
आज दुनिया सिर्फ इसलिए हर प्रकार से धन कमाना चाहती हैं ताकि जीवन मे मौज मस्ती ओर भोग के विषयों को मजबूत किया जा सके।
जीवन मे जब हमारे सामने मुश्किल हालात या मुश्किल समय आता हैं तो हम हार जाते हैं। 
जबकि किसी भी खेल में जितना ज्यादा मानसिक या शरीरिक हालातो से मुश्किलों को सामना जितना ज्यादा यानी हर खेल के बाद फाइनल के लिए बड़ी मुश्किल भरे चरण होते हैं।
जितने ज्यादा मुश्किल चरणों का सामना कोई खिलाड़ी करेगा समझो वो बड़े पद या पायदान की तरफ बढ़ रहा हैं। यानी तास के खेल को ही लेलो जितने ज्यादा दिमाग पर जोर देकर खेलोगे उतनी ज्यादा प्रसिद्धि और इनाम। 
सतरंज का खेल हम सभी खेलते हैं और खेल चुके हैं जोकि मानसिक तनाव के साथ चरणबद्व नियमो से खेलते हुए बिना शारीरिक मेहनत के केवल मानसिक मेहनत के द्वारा खेला जाता हैं ठीक वैसे ही फुटबाल,बास्केटबाल और अन्य बाहरी खेल भी कम मेहनत वाले नही होते हैं।
यानी खेल दो तरह के होते हैं आंतरिक यानी मानसिक और बाहरी यानी शरीरिक। प्रत्येक खेल का अपना नियम और तरीका हैं। प्रत्येक खिलाड़ी के पास अपना तन और मन हैं। जिसके पास जितना दिमाग उतना नाम। 
ठीक वैसे ही बाहरी खेलो में जितनी ज्यादा शरीरिक और मानसिक ताकत उतना नाम और दाम।
इससे एक बात क्लियर हैं कि जिस प्रकार खेल है ठीक वैसे ही जिंदगी हैं जो कि समय समय पर बिना वक्त के पलड़े को बताए खेल खेलती हैं। जिंदगी के खेल में वही व्यक्ति आगे बढ़ सकता हैं जिसके पास मानसिक और शरीरिक हालातो और संघर्षो पर कब्जा हैं। जोकि बिल्कुल 100% सच्चा है।
आज का युग बिना संघर्ष  के सबकुछ पाना जिसमे केवल आराम ही आराम की वस्तुएं।
राजा और नेता जितना संघर्ष करेगा उतना ही जनता का हितेषी और सर्वमान्य होगा। एक बात अपने जीवन मे गांठ बांध लेना कि संघर्षो से मुँह मोड या भोग की तरफ मुड़े लोग आपके विचारों और जीवन को तव्वजो नही देंगे।
भोग तो निम्न और साधारण व्यक्तियों का मुख्य अधिकार हैं। विशेष आत्मा को भोग से नही अपने विशेष कर्मो के द्वारा कदम कदम पर मुस्किलो से सामना करने से ही जीवन मे विशेष सन्मान मिलता है।
जीवन का सार ही यह हैं कि बिना मेहनत और संघर्षो की आग में तपे कोई आगे नही बढा। 
जीवन का सार है की जीवन मे जब जब आप विशेष कर्मो की तरफ बढोगे तो संसार आपको रोकेगा और संसार आपको जगह जगह हर कदम पर संसार व्यवधान डालेगा।
यदि आप संसार मे विशेष कर्मो की तरफ बढोगे तो शायद आपको बदनामी, तिरिस्कार, अफवाहों और इससे भी निम्न दौर के संघर्षो से गुजरना पड़ेगा।
इस लेख के  माध्यम से यही बताने की कोशिश कर रहा हूँ कि अमरता यानी हमारे इस संसार से चले जाने के बाद भी यदि नाम रहे तो आपको भोग की प्रवर्ति छोड़ कर ऐसे कार्यो की तरफ मुड़ जाईये जिनमे जनता की भलाई और जनता के लिए सदैव संघर्षो से लड़ते रहे। 
जीवन मे जितना संघर्ष करोगे उतना संसार याद करेगा। जितना अपना समय और मस्तिष्क भोग और अय्याशियों की तरफ मौड़ दोगे समझो आप जीवन के लक्ष्यों से लाखों मिल दूर निकल गए।
जीवन का सार हैं कि बिना संघर्ष के न तो जंगल का राजा शेर बन सकता हैं  बिना कर्मो के संघर्ष के कोई आने जीवन को आकार दे सकता है। 
बाकी आपकी मर्जी मैं अपने विचार रखने के लिए आजाद हूँ और आप अपने कर्मो के क्षेत्रों में। 

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