जीवन मे दो वर्ग हैं। इंसान वही आगे बढ़ता है जो समय के मुताबिक चलता हैं। समय के मुताबिक अगर आप चल पड़े तो समझो आपका लक्ष्य हो या जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आप सफल हो सकते हैं।
जीवन मे सदैव याद रखना कर्म अवश्य फलता हैं। कर्म दो तरह के होते है। वर्तमान और भविष्य निकट दृष्टि और दूर दृष्टि। निकट दृष्टि में आज पर इंसान जीता हैं। जोकि 90% स्वयं के लिए हो गया। जिसमें किसी भी प्रकार के बिना लक्ष्य के जीवन को जीना जिसमे धन ही केंद्र और जीवन का मुख्य सार ही संसार की भौतिकता को भोगने के लिए स्वयं को सबसे आगे रखता हैं। इस प्रकार का जीवन इंसान में ही नही वरण जीव जंतुओं और पशु पक्षियों में भी होता हैं। आप कभी अपने आसपास ध्यान से देखना की वनस्पति के कितने वर्ग हैं।
तो आप पाएंगे कि एक वर्ग हैं जिसको बेल लता झाड़ झखाड़ और खेती की फसलें यही कुछ दिनों और महीनों में उग जाते हैं। लेकिन आपने जल्दी उगने वाले इस वर्ग का यदि सम्पूर्ण विवेचन करो तो आप पाएंगे कि किस्म और क्विलिटी के साथ साथ मुख्य गुणवत्ता भी साधारण से नीचे ही होती हैं। साथ ही इस वर्ग का जीवन चक्र भी ज्यादा लंबा नही होता। आज 21 सदी का सबसे क्रूर कार्य जो निकल कर आया हैं कि जिस प्रकार बाजार की वस्तु पहले लंबी टिकने वाली लाते थे आज यूज़ और थ्रो वाली ज्यादा चलन में हैं ठीक इस वर्ग का जीवन भी इसी यूज़ एंड थ्रो की नीति पर चलता हैं।
क्योकि यह नीति संसार मे स्वयं की भोग नीति पर चलता हैं। जो जितना भोगी वो उतना उतावला और बिना सोचे किसी भी प्रकार से भोग को पूरा करने के लिए जैसे तैसे धन कमाने में लग जाता हैं। जिसके उद्धरण है तस्कर,लुटेरे,डाकू,मिलावटी समान बेचने वाले और आज कल शिक्षा से सेना तक में कुछ प्रतिशत के लोग इस प्रकार के भी हैं। जो जीवन को शार्ट अपडेट में जीते है।इसलिए
जो जितना जल्दी विकास वो उतना जल्दी विनाश वाली लकीर पर चल पड़ता हैं। इस वर्ग को शतप्रतिशत संसार का भोगी कह सकते हैं। भोगी संसार मे सिवाय भोग के अपने दायरे और स्वार्थ के जीवन से कभी बाहर ही नही आप पता। भोगी वर्ग के विचार में सदैव जल्दी और कैसी विषय और वस्तु का भोग कैसे कर सकता हूँ व उस भोग के लिए कितना धन और अन्य सामग्री लगेंगी। उसके बाद येन केन प्रकार से दिन तस्करी,लूट या अन्य गैर कानूनी तरीको से जोड़ने में लग जाते हैं।
इसी भोग का हिस्सा आज युवा पीढ़ी बन चुकी हैं लगातार आज युवा पीढ़ी जिनके माता पिता जैसे तैसे करके कमाई करके बच्चो को स्कूल और कॉलज भेजते हैं। लेकिन वही युवा नशे और अन्य गैर कानूनी तरीको से तस्करी व लूट के गर्त में जा रहा हैं।
युवाओ के माइंड को बड़ी बड़ी आपराधिक जगत की मछलियों ने इस कदर लील लिया हैं कि कुछ कहना भी ठीक नहीं। कारण एक ही हैं कि भोग वादी नीति व जिनके जीवन का सार ही स्वयं के लिए मजे और भोग की प्रवर्ति को अंजाम देना।
वही आप दूसरा वर्ग मुसीबतों के साथ भी जीवन के उत्तम व वास्तविक जीवन व परिपक्व जीवन के लिए सदैव कार्य करता हैं। कार्य व कर्म का मुख्य उद्देश्य ही मानवकल्याण और अपने परिवार और समाज वंश में आने वाली पीढ़ियों को कुछ बेहतर और उत्तम जीवन जीने का उद्देश्य व साथ चलने वाली पीढ़ी के लिए वर्तमान व आने वाले भविष्य की रचना को बेहतर बनाने की दिशा में कदम।
इस वर्ग की जीवन शैली का पहला नियम हैं कि विकास की यात्रा धीमी और बेहतर विकास के साथ कदम कदम से चलती हैं। इस वर्ग के मानव से लेकर वनस्पति हो या पशु पक्षी जिनके विकास में धीमापन होता है। हर कदम व कार्य योजना को मूर्त रूप देने से पहले आज से लेकर हजारो सालो में आज के इस कार्य कर्म व योजना का संसार व परिवार समाज और मानवकल्याण के लिए क्या महत्व होगा वही मुख्य होता है।
इस वर्ग में भोग से ज्यादा अन्य के लिए प्रकृति के सिद्धांत को तव्वजो दी जाती हैं जिसमे तरवर फल नही खात है सरवर पियत न नीर वाली कहावत चरितार्थ होती हैं।
इस वर्ग के लोग जीवन को आज व अभी से ज्यादा कर्म को लंबे विकास के लिए करते हैं। साथ ही जीवन को किसी निम्न दर्जे व निम्न विषय वस्तुओ के लिए तय नही करते। इस वर्ग भले विकास देरी व ज्यादा समय लेकर हो लेकिन विकास पूर्ण होगा। विकास की यात्रा पूर्ण होगी जोकी जीवन का वास्तविक कर्म फल हैं।
जिनके पास हौसले होते हैं वो लंबा टिकते हैं जो आज के साथ भविष्य के लिए योजनाबद्द तरीके से आगे बढ़ते हैं।
भले लंबे चलने वाले वर्ग में तकलीफ होगी मुसीबते होगी कर्म के अनुसार फल तुरत नही मिलते लेकिन जीवन का यही सार है। लम्बा जीवन पूर्ण जीवन पूर्ण विकास।
यह लेख कैसा लगा कमेंट बॉक्स में जरूर बताना। ऐसे ही अन्य लेख के साथ मैं फिर आपसे मिलूंगा।
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