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धन और जीवन

 धन अर्थात मान सन्मान,इज्जत,रुतबा और सर्वमान्य। गरीब लोगों की सोच हैं कि धन सही और उत्तम विधि और रीति से कमाया हुआ होना चाहिए।

अर्थात धन जोकि संसार के केंद्र में मुख्य बिंदु हैं। जिसके बिना एक कदम चलना संभव नही। 
धन है तो आप शान और शौकत की जिंदगी जी सकते हैं। आपके परिवार,पत्नी बच्चो और समाज के साथ साथ ग्राम और सम्पूर्ण जान पहचान और न जानने वालों के बीच भी चर्चा वो भी हर जगह और हर माफिल में। 
यदि धन नही तो पत्नी के दिल मे भी पति की छवि एक अमान्य और निर्धन व्यक्ति की बन जाएगी।
धन वो चाबी हैं जोकि आज से नही सदियो से हैं। जिसको राजा महाराजा और लुटेरे तक सब से ज्यादा मानते थे। जोकि आज नेता और अभिनेता हो या अन्य धन को ही मुख्य तव्वजो दी जाती हैं। ऐसे में यदि कोई बिना धन के ऊपर लिखी सन्मान की बातों को पाना चाहता हैं तो शायद वो गलत सोच रहा हैं। क्योंकि जीवन मे बिना धन सबकुछ असम्भव हैं। 
जीवन का सार ही धन हैं। आज जिसका कारण भोग और विलासिता हैं।
धन जितना ज्यादा होगा बुद्धि उतनी ज्यादा होगी। धन जितना ज्यादा होगा बुद्धि उतनी ज्यादा विकसित और बेहतर होगी। जीवन मे सबसे अहम ही धन हैं।
सुबह से लेकर शाम तक सम्पूर्ण विश्व आज धन के लिए भाग रहा हैं। धन के बिना न आदमी न ही घर नही देश राज्य और यहाँ तक विश्व भी फीका है। 
धन से ही रसोई में रौनक होती हैं ना ना प्रकार के पकवानों की खुश्बू पकवानों से ही होती हैं। धन से झोपड़ी को महल और आम आदमी को खाश बनाया जा सकता हैं। धन है तो समझो विश्व की सबसे अहम चाबी आपके पास हैं।
बिना धन के सन्मान और इज्जत की आशा मत करना। क्या आप इस पूरी कड़ी में धन और सन्मान के बीच की तव्वजो समझ पाए है। तो अब आप समझो कि जिसके पास भी धन है क्या सभी का सन्मान हैं या सभी केंद बिंदु बनकर चलते हैं या बिना कुछ कहे ही सबकुछ मिल जाता हैं। ऐसा नही हैं। 
धन जब आप सिर्फ अपने लिए अपने शौक मौज और मस्ती या भौतिकता के भोग के लिए उपयोग करते हो। धन का उपयोग यदि आप अपने घर महलो में बदलने के लिए करते हो या अपने लिए गाड़ी घोड़े और अन्य सुविधाओं को बढ़ाने में लगाते हो तो समझो आप सिर्फ घमंडी धनपति बनकर रह जाओगे। यदि आपने हर जगह गिर कर या कही से भी कैसे भी उलटा सीधा व गलत तरीको व गुप्त तरीको से धन कमाया तो भी समाज या सोसायटी में मान और सन्मान नही मिलेगा। यदि धन की आवक के अनुसार यदि खर्च नही किया तो समझो सबकुछ बेकार यदि धन पास में हो और इंसान यदि सिर्फ नमक रोटी खाये और झोपड़ी में सोए तो भी लोग इज्जत तो करेंगे लेकिन कहेंगे कंजूस। लेकिन इतना लोग जरूर कहेंगे कि धन तो अताह हैं लेकिन है कंजूस। 
अब सभी तरीको में धन जहाँ दुसरो के लिए दूसरों की मुसीबतों में और दूसरों की समस्याओ में और दूसरो के लिए उपयोग करते हो तो आपकी चर्चा और इजज्जत ज्यादा होगी। आपके नाम की चर्चा हर गली और मुहल्ले में होगी। 
लेकिन यदि आपके पास धन नही हैं और आप लोगो के धन से मजे और ऐश करना चाहते हो। जिसको उधार लिया धन बोलते हैं तो लोग आपकी इजज्जत क्यो करेंगे। 
उधार धन लेकर जो व्यक्ति ऐश और मौज करते हैं उनके जीवन मे सिवाय बेइज्जती और अपमान के कुछ नही मिलता। ऐसे लोगो को समाज और परिवार यहाँ तक कि पत्नी और बच्चे भी तिरिस्कार की नजरों से देखते हैं। उधार धन से लोग जीवन जीते हैं उससे अच्छा हैं मर जाना।
   उधार की कोई जिंदगी नही होती। यदि वास्तव में आप जीवन मे शिक्षित हैं तो फिर आप धन क्यो पैदा कर पा रहे हैं यह एक सोचने का विषय हैं। शिक्षित होने के बाद यदि धन की कमी हैं तो समझो या तो आप संत यानी संसार के भोग विलास से परे हैं क्योंकि धन हैं तो भोग तो होगा। या फिर आप मूर्ख हैं जो सपने तो उधार या जुगाड़ या ठगी से पूरे कर रहे हो लेकिन वास्तविक और अपनी मेहनत से धन बनाने की कला आपमे नही हैं। इसको जितना जल्दी आप आप अपने मस्तिष्क में बिठा लेंगे उतना सही हैं। जीवन का सार ही शिक्षा से धन प्राप्ति का हैं।
यदि कोई शिक्षित हैं। और गरीब हैं तो इसके निम्न कारण हो सकते हैं। 
1. सन्यासी वैरागी अर्थात जिसको भोग की जितनी इच्छा कम होगी धनु को उतना कम महत्व देगा।
2. आलसी लापरवाह अयास जो धन कमाने के पीछे समय न देकर केवल येन केन जुगाड़ से या इधर उधर से या उधार से अपना जुगाड़ चलता हैं। 
3. जो पढ़ा लिखा मूर्ख हैं या जिसमे जरूरत से ज्यादा इंसानियत या भलाई करने की सोच हैं। जो हर जगह पर किसी को नुकशान पहुँचा कर या नुकशान देकर जीवन मे धन नही कमाना चाहता। इसलिए ऐसे लोग अपने जीवन को इंसानियत के साथ धन से ज्यादा जोड़कर देखते हैं।
4.ऐसे लोग जो संसार मे कुछ कर गुजरने वाले लोग जो जीवन पर्यंत शिक्षा के साथ कुछ बड़ा और बेहतर करने की कोशिश में लगे रहते हैं औकात से ज्यादा बड़ा करने की कोशिश में हमेशा धन की मांग को पूरा करने और समय से आगे की सोचने के कारण सदा लगे रहते हैं कुछ करने में।
5. ऐसे लोग जिनके दिमाग मे धन कमाने की सोच ही नही होती। जो धन के बिना अपना जीवन तमाम मुस्किलों सहन करके चला लेते है। ऐसे लोगो का जीवन धन से ज्यादा अध्यात्म में लगा होता हैं।
इस लेख को पढ़ने के बाद आपको एक बात अवश्य पता लगी हैं। कि आज की शिक्षा पद्दति में धन कमाने को कही नही सिखाया हैं जो कुछ भी पढ़ाया जा रहा हैं उस शिक्षा में केवल विज्ञापन ही मुख्य हैं। जिसका इस उद्धरण से समझते हैं। एक इंटरव्यू में जब एक लड़के ने पूछा कि सर् आपने तो हमे स्कूल और कॉलेज में पढ़ाया की ओरंगजेब ने यह किया बाबर ने वो किया जिसका कमाई से कोई लेना देना नही तो फिर इतिहास को क्यो पढ़ाया जाता हैं जबकि कमाई में इसका कोई लेना देना नही। 
अतः धन और उसकी महिमा को एक छोटे से लेख में मैंने बताने की कोशिश की है। 
युवाओ से मेरा निवेदन हैं कि जितना जल्दी आप कमाई का जरिया और तरीका शिक्षा के साथ सिख लेंगे समझो आपका जीवन सफल बाकी सब ठन ठन गोपाल।
स्कूलों और कॉलेजों में कमाई कैसे करनी हैं को पढ़ना होगा।
आजकल सबसे ज्यादा गरीब हैं वो पढ़े लिखे लोग है समझे। क्योकि क्योकि उनके दिमाग मे पढ़ाई का बहुत है कमाई का नही। अनपढ़ आदमी प्रक्टिकल होता हैं पढ़ा लिखा आदमी पहले थेऔयरिकल और बाद में प्रैक्टिकल होता हैं पढ़े लिखे आदमी का बहुत बड़ा समय थ्योरी में निकल जाता हैं  तब तक अनपढ़ प्रैक्टिकल में बाजी मार लेता हैं। समझे।

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