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लगे रहो,एक दिन मंजिल कदम चूमेगी।

 मोटिवेशन स्पीकर और लाइफ कोच वही बन सकते हैं जो जिंदगी के हर हालात से लड़कर हजारो बार गिरकर,सम्भल कर,उठ कर हर हार और सफलता के बाद जो एक नई कोशिश करे। 

जीवन का कोई पहलू आसान और कई महान और विशेष काम आसान नही। सबसे बड़ी और अहम बात की हजारो ऐसे लोग और परिवार व समाज जिनकी सोच केवल आम आदमी और आम जीवन को जीते हुए गुजारते हुए बिना किसी विशेष बलिदान और समय की पहचान बनाये अपनी जिंदगी आसान रास्तो से होते हुए गुजार देना।
नाम और पहचान उन्हें मिलती हैं जो लाखो की भीड़ से कुछ अलग कर जाए। जो आज भले अपमानों के अनगिनत सायो में हैं अपनो से लेकर हर कोई जिनको तानो और बेइज्जती के अनगिनत बोलो से नवाजते हैं।
साधारण लोगो के लक्ष्य छोटे होते हैं तो पूरे भी जल्दी हो जाते हैं। लेकिन जिन लोगो के लक्ष्य बड़े होते हैं उनके काम पूरे होने में भी समय लगता हैं।
जितना गिरोगे उतनी दुनिया मे आपकी कीमत के तार कसेंगे और लोग जो आपको तोड़ने वाले हैं उनको आपके टूटने का मजा आएगा लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि एक बेहतर पहलवान और खिलाड़ी की खासियत क्या हैं सामने वाले को जीतने देना तब तक जब तक सामने वाला अपनी पूरी ऊर्जा और पैंतरे खो न दे। तभी तो रेसलिंग में गिरने के बाद दाम बढ़ते हैं। 
जीव में एक बात का सदैव ध्यान रखना अपने आपसे सदैव सच रहना। अपने कर्मो और कार्यो को सही दिशा और दशा देते रहना। जीवन की पगडंडियों और रास्तो में लाखों मौड़ आएंगे लेकिन रुकना मत क्योकि इन्ही मौडो पर चलकर लाखो लोग सफल हुआ हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न जोकि हर एक से अपने लिए होना चाहिए कि सबकी पसंद और लक्ष्य अलग अलग हैं। सबके लक्ष्यों के रास्ते अलग हैं लक्ष्यों के लिए लगने वाली मेहनत अलग हैं संसाधन अलग हैं। सोच और नजरिया अलग हैं। साथ देने और चलने वाले अलग हैं।
जीवन के वास्तविक और विशेष कार्यो के लिए जिनके दिलो में कुछ भी कर गुजर जाने का मादा है। जिनका हौसला हर तकलीफ और बुरे दौर से निकलने में बिना रुके और बिना थमे निडर चलते जाने का हैं। वही लोग जीवन मे सफल होते हैं।
जीवन का सबसे बड़ा मंत्र जोकी सफल होने वाले लोगो ने जिन्होंने अपने लक्ष्य तय किये उनके कहे शब्द हैं लगे रहो एक दिन मंजिल तुम्हारे कदम चूमेगी। कितना समय और कब इस प्रश्न से परे और अलग रहकर चलते जाओ।
  जीवन मे मजे उनको चाहिए जो साधरण होते हैं जीवन मे टकराव और तकलीफ उनको चाहिए जिनको जीने की आदत नही कुछ कर गुजरने की आदत हैं। अकसर लोग मजे की आवाज को कान देते हैं लेकिन बिरले होते हैं जो मजे से ज्यादा कुछ कर जाने की आवाज को कान देते हैं।

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