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जीवन की रफ्तार।

 


सच कहा किसी ने"तेज चलने वाले लंबे नही चलते। लंबे चलने वाले तेज नही चलते" जिसने इस वाक्य को समझ लिया समझो पूरी दुनिया उसके कदमो में। इस वाक्य को समझने वाला कुछ भी लार सकता हैं। अब कितना चलना हैं किसे चलना हैं। चलने वाले पर निर्भर हैं।
जीवन के दो आयाम हैं तेज और धीरे। दोनों के अपने मतलब और वजूद हैं। तेज चलने के अपने फायदे और कायदे हैं। धीरे चलने के अपने आयाम और पैगाम हैं।
चलना दोनों ही स्थिति में हैं। जैसे ही हम चलते हैं रफ्तार किसकी कैसी रहती हैं वही राही की दिशा और दशा तय करती हैं।
जीवन मे अक्सर लोग क्या कहेंगे के कारण लोग अपनी रफ्तार की चाबी दुसरो को सौंप देते हैं। जब रफ्तार की चाबी ही आपके हाथ मे नही हैं तो फिर लोग क्यो आपको मानेंगे। 
जिसकी रफ्तार जिसकी मर्जी पर निर्भर जिसकी जीवन की गाड़ी जिसके हाथ समझो वही हो गया जीवन का खेवैया। 
जीवन मे किस लक्ष्य के लिए किस रफ्तार की जरूरत हैं। इसका अंदाजा आपको लक्ष्य तय करने से पहले आपको पता होना चाहिए। जीवन का प्रत्येक कार्य अपनी रफ्तार से होता हैं। 
जिसकी जैसी रफ्तार वैसी लक्ष्य तक पहुचने की आशा। 
जीवन मे आप क्या करना चाहते हैं। जीवन मे आप क्या रचना चाहते हैं जीवन मे आप क्या बनना चाहते हैं। जीवन मे आपका विकास और कार्य करने की क्या मनसा हैं यही आपकी असली दौलत हैं। जीवन मे अब आपके द्वारा तय नित्य नियम ही आपके जीवन की रफ्तार को कायम रखेंगे। 

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