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kyo nahi hota || क्यों नहीं होता

     क्यों नहीं होता || क्यों नहीं मिलता आज इस विषय पर लिखूंगा. अक्सर लोग कुछ न कुछ कहते हैं जब उनका कोई काम नहीं होता या बिगड़ जाता हैं. हम सभी कहते हैं "क्यों नहीं होता " "क्यों नहीं हुआ ". अक्सर हम दुखी हो जाते हैं. क्या आपको पता हैं की दुनिया में सबसे बड़ा धोखा क्या हैं और कौन किसीको देता हैं. दोस्तों इन प्रश्नो का एक ही उत्तर हैं की इस दुनिया में अगर कोई सबसे बड़ा दुश्मन अगर हमारा हैं और सबसे बड़ा धोखा क्या हैं तो इसका एक ही उत्तर हैं और वो उत्तर हैं "हम स्वयं". इस दुनिया में हम से बड़ा न तो कोई दुश्मन हैं और न ही कोई धोखेबाज। जोकुछ हम भुगत रहे हैं उसका जवाब हम ही हैं. अगर आप अच्छा कर रहे हैं तो भी आप ही अच्छा कर रहे हैं और बुरा हो रहा हैं वो भी हम स्वयं से हो रहा हैं. कितनी बड़ी विडंबना हैं की नींद से तो फुर्सत नहीं और चले हैं हुसैन बोल्ट और सचिन बनने। पहले अपने आपको बहानो से बहार निकालो अपने आपको आईने  सामने खड़ा करके स्वयं से सवाल करो की क्या तुम 100% सही दिशा में  समय के साथ अपने सुचारु लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हो. सिर्फ और सिर्फ दुनिया को दोष देते हैं...

Sapne || सपने

अक्सर हम एक धारणा में जी रहे हैं कि सपने तो सिर्फ नींद में देखे जाते हैं। सपने तो उल्टे पुल्टे उटपटांग होते हैं। जिनका हकीकत की जिनदगी से कोई लेना देना नही। न ही इन सपनो को देखने और मेहनत करने से सपने सच होते हैं। मेरा मानना हैं कि अगर किसी को रात में गहरी नींद में सपना आये की वो एक नगर का महान राजा बन गया तो मैं इस सपने को सही नही मानूंगा। लेकिन एक पढ़ने वाला छात्र अगर अपने दोस्त से कहे कि मेरा सपना हैं कि मैं कड़ी मेहनत करू रात दिन मेहनत करू और एक दिन कलेक्टर बनकर देश और समाज व परिवार की सेवा करू।  इसके लिए मुझे चाहे कुछ भी क्यो न करना पड़े। मेरा मानना हैं कि यह छात्र कलेक्टर बन सकता हैं। भले वो गरीब परिवार में ही क्यो पैदा नही हुआ। लेकिन एक छात्र सिर्फ और सिर्फ सोते जागते कहते रहता हैं कि मुझे कल रात में सपना आया था कि मैं कलेक्टर बन गया हूं। छात्र के पास न तो पढ़ने का नियमित कार्यक्रम हैं। न ही पढ़ाई को समय देता हैं। जब भी कोई उसको पढ़ने का कहता हैं। तो बिना किसी सोच विचार के कहता रहता हैं। कि मैं एक दिन कलेक्टर बनूँगा। मेरे पास बड़ी सी गाड़ी होगी। नोकर चाकर होंगे। बड़ा सा बंगला होग...

Tension || टेंशन

टेंशन अर्थात दुख हताशा बुरे ख्याल। न जाने कैसे कैसे ख्याल आते हैं। जब टेंशन होता हैं। टेंशन यह शब्द लगभग हर व्यक्ति के मुँह से दैनिक जीवन मे बोला जाता हैं। टेंशन से कोई दोस्ती नही करना चाहता। टेंशन के साथ कोई हाथ नही मिलाना चाहता। कारण टेंशन को लोग दुख का सूचक मानते हैं । अक्सर टेंशन असफलता से जुड़ा हुआ होता हैं। आज और सदियों से लोग सिर्फ और खुश रहना और सफल होना चाहते हैं। असफल और दुखी होने कोई नही चाहता। हम सभी हमेशा सभी के साथ जब कोई बुरी या असफल घटना घटती हैं तो सिर्फ एक शब्द सबके मुँह से निकलता हैं। यार जिंदगी में इतना टेंशन हैं कि क्या बताऊँ। यार फला काम नही हुआ। क्या करूँ। किसको बताऊ। अक्सर छोटे छोटे बच्चो को टेंशन नामक शब्द को बोलते सुनते हैं। यार होम वर्क नही किया कल स्कूल में पिटाई का टेन्शन हैं। क्या करूँ क्लास टीचर पनिशमेंट देगी उसका भी टेंशन। कुल मिलाकर ऊपर जो कुछ भी लिखा हैं। उसमे एक शब्द ही मुख्य हैं। "टेंशन". अब सबसे पहले हमे इस शब्द से डर और खोफ क्यो हैं। उसका कारण हैं। बिना कुछ नुकसान के सिर्फ और सिर्फ सफलता। बिना किसी कीमत के फायदा। बिना दौड़े प्रथम आ...

शार्ट कट हैं अभिशाप!

हेलो,दोस्तो   आप कैसे हैं। आपको आपके लंबे जीवन के लिए शुभकामना। दोस्तो,आज की मेरी पोस्ट का विषय हैं" शार्ट कट अभिशाप हैं" दोस्तो, आज मैं मेरे विचार में वास्तव में शार्ट कट को अभिशाप मानता हूँ। शार्ट कट तो कमजोर दिल वालो का हथियार हैं। अक्सर आप जब शाम ढल जाती हैं। और कोई दूसरे मौहल्ले का बच्चा आपके बेटे का दोस्त हैं। रात पड़ने लगे गयी हैं। तो आप उस बच्चे को क्या कहोगे। बेटा वहाँ से मत जाना वहा काफी अंधेरा हैं। तो वो सामने से शर्माजी के घर के अंदर से शार्ट कट हैं। वहाँ से चले जाओ।  मतलब शर्मा जी बच्चे को घर मे से निकलने देंगे। क्योकि वो कमजोर और छोटा हैं। लेकिन बड़ो को थोड़े ही निकलने देंगे। क्योंकि वो मजबूत हैं। तो जीवन के किसी भी क्षेत्र में आप अगर शार्टकट से कोई परीक्षा या कार्य करते हैं। तो आप मजबूत नही कमजोर होने की निशानी हो  दूसरा किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है। सेना के एक पेपर होने के बाद साक्षात्कार में अधिकारी ने पूछा कि आपको एक ऐसा प्रश्न पूछुंगा जो बहुत आसान है। अगर आप इस प्रश्न का उत्तर नही दे पाए तो आप असफल माने जाएंगे।  लड़के चुप चाप बैठे सुन रहे थे। तभी अध...

लोग क्या कहेंगें।

हेलो,दोस्तो आप कैसे हैं।  आपका हर दिन खुशी से बीते। यह मेरी ब्लॉगर पर पहली पोस्ट हैं।  आज की पोस्ट का विषय है। जिसको आपने ऊपर पढ़ा होगा। फिर भी मैं बता देता हूँ "लोग क्या कहेंगे। आज मैं आपको इस विषय पर मेरा अनुभव और इसकी गहराई के बारे में लिखूंगा।  दोस्तो,   सबसे पहले मैं आपको बता दु की मेरी किसी भी पोस्ट का जो मतलब हैं वो किसी परंपरा या संस्कृति के खिलाफ नही हैं।  दोस्तो, अब मैं आता हूँ। आने मूल विषय पर। अक्सर आप और मैं यह कहते सुनते हैं। कि यार लोग क्या कहेंगे। लोग मेरे बारे में क्या बाते करेंगे। अगर नही हुआ तो। मै लोगो को क्या जवाब दूंगा।  दोस्तो अक्सर इसी उधेड़बुन में हजारो लाखो काबिल लोग अपने सपने अधूरे छोड़कर सिर्फ लोगो को खुश करने में लग जाते हैं। जबकि लोग कभी भी आपसे खुश नही होते। लोग सिर्फ दो ही बातें चाहते  हैं। पहली ये बन्दा हमसे आगे नही बढ़ना चाहिए किसी भी हालत में। दूसरा गिरने के बाद हेकड़ी मारना की हमने कहा था न कि ये बन्दा कभी ये काम नही कर सकता। लोग सिर्फ किसी को अपने आगे गिरता देखना चाहते हैं। या फिर आप उनके झुंड में शामिल हो जाओ।...

आशा अमर धन हैं।

हेलो, दोस्तो आप कैसे हैं।  मेरी तरफ से आपको आपके जीवन के लिए शुभकामना। दोस्तो,आज की पोस्ट का विषय हैं। "आशा अमर धन हैं". हम जीवन मे कई काम करते हैं। जीवन के लिए और अपनी सफलता और विकसा के लिए। नॉकरी,व्यापार,खेल।   लेकिन कभी कभी परिणाम हमारे मन मुताबिक नही आते। हम जैसा चाहते हैं। वैसा नही होता। लोग हमसे आगे निकल जाते हैं। कभी कभी हम बहुत कुछ करने के बाद भी मंजिल तक नही पहुंच पाते। कुछ तो बिना मेहनत के भी कहते मिलते हैं कि यार ऊपर वाला कितनी तकलीफ देगा। कब  ये होगा। कब वो होगा लेकिन मेहनत और मंजिल के लिए केवल मेहनत ही नही और भी बहुत कुछ होना चाहिए आपके तरकश में। जब आपके तरकश में सभी प्रकार के तीर होंगे तभी आप अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। तरकश के तिरो में मेहनत,शिक्षा,समय,त्याग,तपस्या,लक्ष्य,योजना,आशा और दृढ़ता के साथ संकल्प व शांति के साथ उचित संस्कार और क्षमा और मुस्कान। ये है आपके लिए मंजिल तक पहुचने के तीर। इन् तिरो में सबसे बड़ा और उपयोगी तीर हैं आशा का। आशा ही अमर धन हैं। किसान आशा के कारण साल दर साल काल पड़ने के बाद में अपने जीवन को जीता हैं। और कभी अपने खेतों म...