अक्सर हम एक धारणा में जी रहे हैं कि सपने तो सिर्फ नींद में देखे जाते हैं। सपने तो उल्टे पुल्टे उटपटांग होते हैं। जिनका हकीकत की जिनदगी से कोई लेना देना नही। न ही इन सपनो को देखने और मेहनत करने से सपने सच होते हैं। मेरा मानना हैं कि अगर किसी को रात में गहरी नींद में सपना आये की वो एक नगर का महान राजा बन गया तो मैं इस सपने को सही नही मानूंगा।
लेकिन एक पढ़ने वाला छात्र अगर अपने दोस्त से कहे कि मेरा सपना हैं कि मैं कड़ी मेहनत करू रात दिन मेहनत करू और एक दिन कलेक्टर बनकर देश और समाज व परिवार की सेवा करू। इसके लिए मुझे चाहे कुछ भी क्यो न करना पड़े। मेरा मानना हैं कि यह छात्र कलेक्टर बन सकता हैं। भले वो गरीब परिवार में ही क्यो पैदा नही हुआ।
लेकिन एक छात्र सिर्फ और सिर्फ सोते जागते कहते रहता हैं कि मुझे कल रात में सपना आया था कि मैं कलेक्टर बन गया हूं। छात्र के पास न तो पढ़ने का नियमित कार्यक्रम हैं। न ही पढ़ाई को समय देता हैं। जब भी कोई उसको पढ़ने का कहता हैं। तो बिना किसी सोच विचार के कहता रहता हैं। कि मैं एक दिन कलेक्टर बनूँगा। मेरे पास बड़ी सी गाड़ी होगी। नोकर चाकर होंगे। बड़ा सा बंगला होगा। जब मैं गाड़ी से उतरूंगा तो चपरासी मेरी गाड़ी का गेट खोलेगा।
आप दिल से बताना कि इन दो छात्रों के उद्धरण में कौनसा लड़का कलेक्टर बनेगा। इस दुनिया मे जोभी कुछ बना हैं। जो भी किसी ने पाया हैं। उन्होंने जागती आंखों से पूरे होश और हवास में सपने देखे हैं। और उन्हीने अपने सपनो को पूरा करने के लिए जान लगा दी। सपने तभी सच होंगे जब आप उनको पूरा करने के लिए सो सको। रात को नींद नही और शरीर को विश्राम नही तभी सपने सच होंगे।
खिलाड़ी बनने का सपना देखने के बाद घंटो ट्रैक पर पसीना बहाना होगा। न जाने कितनी असफलताओं के बाद सफलता मिलेगी और सपना सच होता हैं एक खिलाड़ी का। सपना सच होने के बाद भी खिलाड़ी विश्राम नही करता। कारण अपने सपने को कायम रखने के लिए।
सपना देखने से नही सपनो के लिए क्या आप अपना सबकुछ दांव पर लगा सकते हैं। यदि हां तो भी हजारो असफलताओं से टकराने की व वक्त से लड़ने की ताकत होनी और बनानी जरूरी हैं।
अगर ऊपर लिखी बातों के बाद आपको लगता हैं कि मेरा सपना हैं कि मैं यह बनू या करू तो असम्भव इस दुनिया में कुछ भी नही।
एक कहावत हैं।
जब मानव जोर लगता हैं तो पत्थर भी पानी बन जाता हैं।
शायद आप मेरे विचारों से सपने की दी गयी व्याख्या से संतुष्ट हैं तो उसको अपने दोस्तों में शेयर करे। ताकि अन्य भी पढ़
लेकिन एक पढ़ने वाला छात्र अगर अपने दोस्त से कहे कि मेरा सपना हैं कि मैं कड़ी मेहनत करू रात दिन मेहनत करू और एक दिन कलेक्टर बनकर देश और समाज व परिवार की सेवा करू। इसके लिए मुझे चाहे कुछ भी क्यो न करना पड़े। मेरा मानना हैं कि यह छात्र कलेक्टर बन सकता हैं। भले वो गरीब परिवार में ही क्यो पैदा नही हुआ।
लेकिन एक छात्र सिर्फ और सिर्फ सोते जागते कहते रहता हैं कि मुझे कल रात में सपना आया था कि मैं कलेक्टर बन गया हूं। छात्र के पास न तो पढ़ने का नियमित कार्यक्रम हैं। न ही पढ़ाई को समय देता हैं। जब भी कोई उसको पढ़ने का कहता हैं। तो बिना किसी सोच विचार के कहता रहता हैं। कि मैं एक दिन कलेक्टर बनूँगा। मेरे पास बड़ी सी गाड़ी होगी। नोकर चाकर होंगे। बड़ा सा बंगला होगा। जब मैं गाड़ी से उतरूंगा तो चपरासी मेरी गाड़ी का गेट खोलेगा।
आप दिल से बताना कि इन दो छात्रों के उद्धरण में कौनसा लड़का कलेक्टर बनेगा। इस दुनिया मे जोभी कुछ बना हैं। जो भी किसी ने पाया हैं। उन्होंने जागती आंखों से पूरे होश और हवास में सपने देखे हैं। और उन्हीने अपने सपनो को पूरा करने के लिए जान लगा दी। सपने तभी सच होंगे जब आप उनको पूरा करने के लिए सो सको। रात को नींद नही और शरीर को विश्राम नही तभी सपने सच होंगे।
खिलाड़ी बनने का सपना देखने के बाद घंटो ट्रैक पर पसीना बहाना होगा। न जाने कितनी असफलताओं के बाद सफलता मिलेगी और सपना सच होता हैं एक खिलाड़ी का। सपना सच होने के बाद भी खिलाड़ी विश्राम नही करता। कारण अपने सपने को कायम रखने के लिए।
सपना देखने से नही सपनो के लिए क्या आप अपना सबकुछ दांव पर लगा सकते हैं। यदि हां तो भी हजारो असफलताओं से टकराने की व वक्त से लड़ने की ताकत होनी और बनानी जरूरी हैं।
सिंह जंगल का राजा हैं। लेकिन अपने शिकार को पाने के लिए उसे हिरण के शिकार के लिए भागना पड़ेगा। सोते सिंह के मुँह में हिरण नही आता। अतः सिंह जंगल का राजा जरूर हैं। लेकिन अगर उसने किसी दिन अगर किसी विशेष जानवर के मांस का सपना देखा हैं तो सिंह को उतना ही ज्यादा अपने आप को खपाना पड़ेगा। सपना जितना बड़ा मेहनत और तकलीफ उतनी बड़ी। सपनो को पूरा करने के लिए कुछ मुख्य बाते हैं जिनके बिना कभी सपने पूरे नही होते। वो हैं। मेहनत,धैर्य,हिम्मत,असफलताओं को पछाड़ने की ताकत,लग्न,इच्छाशक्ति और एक सक्षम दृष्टि। सपनो को पाने के लिए रास्ते मे जरूरी सामग्री जैसा सपना वैसी सामग्री। अगर खिलाड़ी हैं तो शारीरिक। अगर व्यापारी हैं तो अर्थ और व्यापार की समझ व अगर असफल हो जाए तो फिर से खड़े होने की ताकत। दुनिया के ताने सुनने की ताकत और समझ।
अगर ऊपर लिखी बातों के बाद आपको लगता हैं कि मेरा सपना हैं कि मैं यह बनू या करू तो असम्भव इस दुनिया में कुछ भी नही।
एक कहावत हैं।
जब मानव जोर लगता हैं तो पत्थर भी पानी बन जाता हैं।
शायद आप मेरे विचारों से सपने की दी गयी व्याख्या से संतुष्ट हैं तो उसको अपने दोस्तों में शेयर करे। ताकि अन्य भी पढ़

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