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Tension || टेंशन

टेंशन अर्थात दुख हताशा बुरे ख्याल। न जाने कैसे कैसे ख्याल आते हैं। जब टेंशन होता हैं। टेंशन यह शब्द लगभग हर व्यक्ति के मुँह से दैनिक जीवन मे बोला जाता हैं। टेंशन से कोई दोस्ती नही करना चाहता। टेंशन के साथ कोई हाथ नही मिलाना चाहता। कारण टेंशन को लोग दुख का सूचक मानते हैं । अक्सर टेंशन असफलता से जुड़ा हुआ होता हैं।

आज और सदियों से लोग सिर्फ और खुश रहना और सफल होना चाहते हैं। असफल और दुखी होने कोई नही चाहता। हम सभी हमेशा सभी के साथ जब कोई बुरी या असफल घटना घटती हैं तो सिर्फ एक शब्द सबके मुँह से निकलता हैं। यार जिंदगी में इतना टेंशन हैं कि क्या बताऊँ। यार फला काम नही हुआ। क्या करूँ। किसको बताऊ।
अक्सर छोटे छोटे बच्चो को टेंशन नामक शब्द को बोलते सुनते हैं। यार होम वर्क नही किया कल स्कूल में पिटाई का टेन्शन हैं। क्या करूँ क्लास टीचर पनिशमेंट देगी उसका भी टेंशन।
कुल मिलाकर ऊपर जो कुछ भी लिखा हैं। उसमे एक शब्द ही मुख्य हैं। "टेंशन".

अब सबसे पहले हमे इस शब्द से डर और खोफ क्यो हैं। उसका कारण हैं। बिना कुछ नुकसान के सिर्फ और सिर्फ सफलता। बिना किसी कीमत के फायदा। बिना दौड़े प्रथम आना। एक तो टेंशन इस प्रकार का हैं। इन सभी स्तिथियो में जब कभी कोई सफल नही होता हैं तो टेंशन बढ़ता हैं। हम हताश हो जाते हैं। कभी कभी मजबूत डिप्रेशन में चले जाते हैं। कारण बिना मेहनत और तैयारी के सबकुछ पाना। जो कि असम्भव हैं।

एक तरफ धावक दिन रात ट्रैक में मेहनत करता हैं। विद्यार्थी अध्ययन करता हैं। वैज्ञानिक मेहनत करता हैं। किसान,जवान और सभी घर पर माँ से लेकर पिताजी। सबको किसी न किसी का टेंशन होता हैं। सोचे गए सभी सपने भी पूरे नही होते। न ही सोचे गए सभी कार्य समय से पूरे होते हैं। न ही धावक को हमेशा जीत मिलती हैं। लेकिन फिर भी वो अपनी मेहनत करते हैं। तैयारी करते हैं। टेंशन इनको भी हैं। लेकिन इन सभी को पता हैं कि टेंशन लाइफ का एक हिस्सा हैं अंत नही ।
कुछ लोग थोड़ा सा टेंशन जिंदगी में आया नही की मौत को गले लगा लेते हैं। डिप्रेशन में चले जाते हैं। इससे यह साबित होता हैं। कि टेंशन की कोई गलती नही सिर्फ लेने वाले पर निर्भर हैं।
बिना टेंशन के आज तक कोई सफल नही हुआ हैं। फर्क सिर्फ इतना हैं आपकी अपेक्षा क्या हैं। अपेक्षा का क्या महत्व हैं। अपेक्षा किसमे और किसके लिए हैं। अपेक्षा सिर्फ और सिर्फ मतलब की हैं या सामाजिक और विश्व कल्याण की हैं।
जितना बड़ा लक्ष्य और रास्ता उतनी ज्यादा टेंशन। जबतक टेंशन नही तबतक जिंदगी में बदलाव नही हो सकता। टेंशन यदि सकारात्मक हैं तो बदलाव कल्याणकारी होगा। टेंशन यदि मतलबी और स्वार्थ से लबरेज हैं तो टेंशन नकारात्मक और अकल्याणकारी होगा।

टेंशन से अटेंशन आती हैं। अर्थात टेंशन ही वो कड़ी हैं जिससे इंसान का वास्तविक विकास होता हैं। भले वो विकास बाहरी हो या अंदरूनी हो। ज्यादतर टेंशन अंदरूनी कंडीशनर का काम करता हैं। जीवन मे ऐसा कोई इंसान नही जिसकी जिंदगी में टेंशन ने दस्तक नही दी।

इसलिए दोस्तो टेंशन तो जीवन का अचार हैं। जिसके बिना जीवन का मजा ही नही। टेंशन के सामने अकड़ कर खड़े रहो। हंस कर टेंशन का सामना करो। जहाँ टेंशन आपको मिल रहा हैं। उसी जगह और स्तिथि पर गौर करो। टेंशन ही वो कड़ी हैं जिसको यदि सही तरह से सामना कर लिया और अंदर से एक मजबूत इरादा बना लिए एक बार फिर चलने का तो मैं आपसे वादा करता हूँ कि टेंशन ही आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाएगा।

लेखक
मोती सिंह राठौड़

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